Wednesday, September 22, 2010

आह ! पानी

तूफ़ान उड़ा कर ले गया
मेरे घरौंदे की छत को
जल मग्न कर गया
मेरी आशा और सपनों को .

बेबस देखती मैं रह गई
करूँ क्या कुछ सूझा नहीं
प्रकृति की भ्रकुटि तनी हुई
बचाऊँ क्या कुछ बचा नहीं .

पलायन परोस रहा पानी
नदियों में उफनता हाहाकार
सच लगे कि दुनिया है जानी
देख मेघों का प्रबल प्रहार .

इन्द्रदेव क्यों रुष्ट हुए
पानी पानी कर दिया जगत
तनिक रुको सब पस्त हुए
जन जीवन है हुआ त्रस्त .

यमुना तट पर ठगी खड़ी
चिन्ह न शेष ठिकाने का
तांडव लहरें उठती गिरती
पानी भी सूख गया आँखों का .

13 comments:

  1. समसामयिक घटना का मार्मिक चित्र खींच दिया आपने। सच मुच इस बार यमुना बहुत क्रोधित है और बरसात रुकने का नाम ही नहीं ले रही। अच्छी लगी रचना। शुभकामनायें

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  2. bilkul sahi likha apne madam jee, ye barish ka kuch nake irade nahi lag rahe hai

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  3. आज के हालात का सटीक चित्रण कर दिया।

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  4. यमुना तट पर ठगी खड़ी
    चिन्ह न शेष ठिकाने का
    तांडव लहरें उठती गिरती
    पानी भी सूख गया आँखों का ।

    मार्मिक चित्रण .बधाई .

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  5. यमुना तट पर ठगी खड़ी
    चिन्ह न शेष ठिकाने का
    तांडव लहरें उठती गिरती
    पानी भी सूख गया आँखों का .
    इतना पानी कि ...
    सुन्दर अभिव्यक्ति

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  6. जिस नदी के महत्व को कृष्ण के अठखेलियों से घटा कर एक नाले का कर दिया गया हो वह क्रोधित भी न हो!

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  7. पलायन परोस रहा पानी
    नदियों में उफनता हाहाकार
    सच लगे कि दुनिया है जानी
    देख मेघों का प्रबल प्रहार .
    बहुत सुंदर रचना

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  8. सच आज यही स्थिति है ....हर जगह पानी ही पानी ...अच्छी रचना ..

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  9. पानी ही पानी हर जगह पानी ही पानी ...अच्छी रचना ..

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  10. यमुना तट पर ठगी खड़ी
    चिन्ह न शेष ठिकाने का
    तांडव लहरें उठती गिरती
    पानी भी सूख गया आँखों का .
    वाकई इस बार की बारिस ने तो हलकान ही कर दिया .बिम्ब के सहारे यथार्थ का बेहद सुंदर और सटीक चित्रण.

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