Friday, September 17, 2010

उर्मिला

निर्वासन था सिर्फ राम का
भोगा क्यों लक्ष्मण ने वनवास
सिया करे निर्वाह धर्म का
उर्मिला जिए विरह का पाश ।


पुरुषोत्तम पूजे जाते राम
सीता एक सती कहलाई
विस्मृत हुआ लक्ष्मण नाम
उर्मिल गाथा गाई गई

मर्यादा के प्रतीक हैं ये
जीवन मूल्यों की है थाती
पुरोधा संस्कारों के ये
है नैतिकता की पाती ।

आज जरुरत एक राम की
बलिहारी जाये पितृ वचन पर
प्रतीक्षा हमें है लाखन की
भेंट चढ़ जाए भाई प्रेम पर ।

सीता सी कोई पतिव्रता
सक्षम हो लाज बचाने में
असुरों का जो विनाश करे
प्रतिमान समाज चलाने में ।

उर्मिला है इन सबसे ऊपर
ऊँचा हैं उसका बलिदान
परित्यक्त जीवन जिया उसी ने
देकर मौन प्रेम प्रतिदान .

15 comments:

  1. Kya khub likha hai ati uttam

    apne sahi likha hai ke urmila ka dukh kisi ne nahi jana. apne sahi question uthaya hai

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  2. बहुत अच्छा लिखा है...बधाई

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  3. उर्मिला के त्याग की चर्चा रामायण में नहीं की गयी उसे वो स्थान और मान ही नहीं दिया जिसकी वो हकदार थी...उसके साथ ना इंसाफी की गयी जबकि उर्मिला का त्याग सीता से भी बड़ा है...
    आपकी रचना अप्रतिम है...बधाई स्वीकारें.

    नीरज

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  4. बहुत सुंदर
    बहुत सुंदर
    बहुत सुंदर
    बहुत सुंदर

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  5. अनेक mythological चरित्र ऐसे हैं ,जिन्हें पर्याप्त श्रेय नहीं मिल सका है ,उर्मिला भी ऐसी ही उपेक्षिता रही हैं .
    आपने उर्मिला के दर्द को अभिव्यक्त करने का सराहनीय काम किया है .
    अनुरोध है कि ऐसे ही अन्य चरित्रों पर भी लिखें .

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  6. गूढ़ मनस में उर्मिला के,
    कितना भारी दान छिपा है,
    अपनों का अभिमान छिपा है।

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  7. सच कहा आपने उर्मिला का मौन बलिदान भुलाया नहीं जा सकता . बेशक कहीं शास्त्रों में उसका बखान ना किया हो...लेकिन मन से सभी मानते हैं. बहुत अच्छी अभिव्यक्ति.

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  8. बहुत सटीक भाव ...आपकी कविता पढ़ मैथिली शरण गुप्त कि साकेत याद आ गयी ...उर्मिला के त्याग को लोगों ने नज़र अंदाज़ किया ..

    बहुत अच्छी भावाभिव्यक्ति

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  9. बहुत बेहतरीन लेखन..रचना अच्छी लगी.

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  10. कई सवाल खड़े करती है आपकी रचना
    मुझे तो बहुत ही अच्छी लगी
    मेरी बधाई स्वीकारें

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  11. उर्मिला की वेदना को बखूबी उकेरा है………………बहुत ही सुन्दर रचना।
    मैने भी इसी विषय पर लिखी थी एक रचना----------उर्मिला की विरह वेदना।
    आपने भी गज़ब का लिखा है।

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  12. bhai mere aise kai patra hai jo gumnam hai lekin jiski charcha nahi hoti urmila mira inka tyag to bhagwan bhi salam kare urmila to sakshta ma sati hai jo bina kucha kahe apna dharma nibhati hai aise ma ko mera karodo karodo salam

    bhaskar

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