Thursday, January 5, 2012

बहुत दिनों बाद














 आज धूप 
थोड़ी अधिक खिली है
पत्तों में है
नया हरापन 
बहुत दिनों बाद

आज फूल 
थोड़े अधिक चटक हैं 
उनकी लाली में है 
कुछ हया 
बहुत दिनों बाद 

आज भँवरे 
थोड़े अधिक गुनगुना रहे हैं 
उनके गीतों में है 
कुछ प्रणय 
बहुत दिनों बाद 

आज कलियाँ 
थोड़ी अधिक चहक रही हैं 
उनके खिलने में है 
कुछ ही पल 
बहुत दिनों बाद 

आज पुरवाई 
थोड़ी अधिक बावरी है 
उसकी गति में है 
कहीं पहुँचने की जल्दी 
बहुत दिनों बाद 

आज कोकिल 
थोड़ी अधिक कूक रही है 
उसकी बोली में है 
कोई छिपा सन्देश 
बहुत दिनों बाद  

आज मंजरियाँ 
थोड़ी अधिक झूल रही हैं 
उसकी लटों में हैं
आलिंगन की उत्कंठा 
बहुत दिनों बाद . 


8 comments:

  1. man ki gati k saath sab kuchh chal raha lagta hai....naye saal me dua he ye sab acchhe acchhe badlaav baawre ban aate rahen.

    sunder prastuti.

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  2. आज मंजरियाँ
    थोड़ी अधिक झूल रही हैं
    उसकी लटों में हैं
    आलिंगन की उत्कंठा
    बहुत दिनों बाद .
    Pooree rachanahee komal,sundar hai.
    Naya saal bahut,bahut mubarak ho!

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  3. प्राकृतिक उपालाम्भों से युक्त सुन्दर रचना

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  4. बहुत सार्थक प्रस्तुति, आभार|

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  5. नयापन यूँ ही लहराकर आता है।

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  6. बहुत बहुत सुन्दर...

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