Tuesday, October 25, 2011

कैसे दीप जलाऊं मैं











चहुँ ओर तिमिर का घन
कैसे दीप जलाऊं मैं
कुछ छंट जाये होवें कम
थोड़े जुगनू ले आऊं मैं


ममता की आँखें पथराई
कैसे दीप जलाऊं मैं
बेटा दंगों की भेंट चढ़ा
सद्भाव कहाँ से लाऊं मैं


निरक्षरता है पाँव पसारे 
कैसे दीप जलाऊं मैं
भुखमरी गरीबी करती बातें
रोटी, कपड़ा दे पाऊं मैं


बिन ब्याही बेटी के सपने
कैसे दीप जलाऊं मैं
लाल जोड़े की आस जगाये
दहेज़ कहाँ से लाऊं मैं


जीवन की साँझ में पलते
कैसे दीप जलाऊं मैं
उनकी जो उठा ले कांवर
श्रवण ढूंढ न पाऊं मैं


बिरहन के सूने नैना
कैसे दीप जलाऊं मैं
भर दे जो सतरंग उजास
प्रिय को उसके ला पाऊं मैं
                                              
                                            फिर तो दीप जलाऊं मैं 

21 comments:

  1. सुन्दर प्रस्तुति
    आपको और आपके प्रियजनों को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें….!

    संजय भास्कर
    आदत....मुस्कुराने की
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. चहुँ ओर तिमिर का घन
    कैसे दीप जलाऊं मैं
    अंतर्द्वन्द की सुन्दर रचना

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  3. दीप जले शंख बजे
    जीवन में सुर सजे

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  4. बहुत सुंदर कविता....दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें... हैप्पी दीपावली..

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  5. चर्चा मंच परिवार की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
    आइए आप भी हमारे साथ आज के चर्चा मंच पर दीपावली मनाइए!

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  6. दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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  7. मन के दीप जलाती रचना, सबके मन का अन्धतम मिटे, सबका जीवन सफल हो।

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  8. sunder prastuti...deepawali ki hardik shubhkamnayen...

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  9. उजास और तम का अद्भुत विरोधाभास प्रस्तुत किया है आपने और संवेदना को एक नया आयाम...
    फिर भी दीप-पर्व की शुभकामनाएं, ताकि वो सारा तम समाप्त हो!!

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  10. दीपावली की ढेर सारी शुभकामनाएं

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  11. भावपूर्ण!
    शुभ दीपावली!

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  12. दीपोत्सव को सार्थक करती अभिव्यक्ति.बहुत भावपूर्ण लिखा है आपने.

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  13. वाह ...बहुत बढि़या ...बहुत-बहुत शुभकामनाएं ।

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  14. चहुँ ओर तिमिर का घन
    कैसे दीप जलाऊं मैं
    कुछ छंट जाये होवें कम
    थोड़े जुगनू ले आऊं मैं
    .....लोक में व्याप्त तम को मिटाने के संकल्प को साकार करती सुन्दर रचना..

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  15. बिन ब्याही बेटी के सपने
    कैसे दीप जलाऊं मैं
    लाल जोड़े की आस जगाये
    दहेज़ कहाँ से लाऊं मैं

    शुभकामनाएं..... ।

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  16. निरक्षरता है पाँव पसारे
    कैसे दीप जलाऊं मैं
    भुखमरी गरीबी करती बातें
    रोटी, कपड़ा दे पाऊं मैं

    Gahari Baat liye panktiyan...Shuhkamnayen...

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  17. दीप जलेंगे तो निराशा भी दूर होगी ...
    बहुत शुभकामनायें !

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  18. बहुत सटीक और भावपूर्ण अभिव्यक्ति ...बहुत सुन्दर

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  19. मार्मिक ... इंसानी विवशताओं का सटीक चित्रण ...

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