Friday, February 17, 2012

ओस


 
बन  ओस की निर्मल बूँद
बरस गए मेरी बगिया
हर पंखुरी आँखें मूँद  
करती आपस में बतियाँ
 
भोर हुई आया अरुणाभ
चुन चुन उनको ले भागा
सुन्दर , शीशे सा तन
देख पुलक चहके कागा
 
पलाश ने लाली मांगी
थोड़ी सी तुमसे उधार
रजनी भी हुई सुवासित
तुमसे लेकर गंध अपार
 
दौड़ी आती है पुरवाई
लेकर तुम्हारा ही सन्देश
कहो प्रिय कैसी हो तुम
पिया भए हैं बहुत विकल
 
गौरैया का नन्हा जोड़ा
गुमसुम है मुझे देख उदास
कहो कौन सा गीत सुनाऊं
भर दे जो नैनन उजास
 
मोहे तनिक पास बुला लो
करता विनय सुर्ख गुलाब
सारे शूल मैं तज दूंगा
रखना अधरों पर मेरी आब .


9 comments:

  1. सुन्दर गीत....
    हार्दिक बधाई..

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  2. ....प्रशंसनीय रचना - बधाई
    मगर बेहद प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करने की बधाई

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  3. बहुत सुन्दर गीत

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  4. मोहे तनिक पास बुला लो
    करता विनय सुर्ख गुलाब
    सारे शूल मैं तज दूंगा
    रखना अधरों पर मेरी आब .्…………बहुत ही खूबसूरत्।

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  5. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच
    पर की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  6. सुन्दर!!!
    मधुर अभिव्यक्ति...

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  7. दौड़ी आती है पुरवाई
    लेकर तुम्हारा ही सन्देश
    कहो प्रिय कैसी हो तुम
    पिया भए हैं बहुत विकल
    मोहे तनिक पास बुला लो
    करता विनय सुर्ख गुलाब
    सारे शूल मैं तज दूंगा
    रखना अधरों पर मेरी आब .
    सुन्दरम मनोहरं .

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