Friday, December 9, 2011

धूप




सोने सा पराग बिखराती 
चंचल सी पीत रश्मियाँ
गहन कालिमा भी हर लेतीं 
लगती नन्ही तरुणियाँ

उज्जवल चादर का सिरा पकड़ 
यह आगे बढती जाती हैं 
फैला दे धवल चांदनी 
जग हर्षित करती जाती हैं 

एक झरोखे से आती 
छन कर छोटी प्यारी धूप 
ओस की बूँदें चुन लाती 
मुस्काती जाती छोटी दूब

गुनगुनी धूप का इक टुकड़ा 
दादी को बहुत लुभाता है
प्रतीक्षा में रहता मुखड़ा 
जब आती, खिल जाता है 

माँ भी तनिक पास आ जाती 
धूप से मिलने, अपनी कहने 
बीती घड़ियाँ लौट कर आती 
हर्षित करती, लगती बहनें 

धूप की आंच हर रिश्ते को प्रिय 
सुलझा  देती हर उलझन 
धागे में धागे हों चाहे 
मन में चुभी कोई उलझन 

काश कि मेरे वश में होता 
धूप को मुट्ठी में भर लेती 
जब दिखते मेरे प्रिय उदास 
चेहरे पर उजास भर देती 

14 comments:

  1. गुनगुनी धूप का इतना सुन्दर शब्द चित्र !
    आभार !

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  2. काश कि मेरे वश में होता
    धूप को मुट्ठी में भर लेती
    जब दिखते मेरे प्रिय उदास
    चेहरे पर उजास भर देती………वाह कितने खूबसूरत भाव हैं।

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  3. बहुत ही सुन्दर शब्दचित्र खींचा है आपने साथ ही जिस प्रकार आपने प्राकृतिक बिम्बों को व्यक्तिगत भावों से जोड़ा है वह अद्भुत है!!

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  4. काश कि मेरे वश में होता
    धूप को मुट्ठी में भर लेती
    जब दिखते मेरे प्रिय उदास
    चेहरे पर उजास भर देती
    Kitne sundar bhaav hain!

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  5. जब दिखते मेरे प्रिय उदास
    चेहरे पर उजास भर देती
    बहुत ही खास एहसासों को समेटे हैं यह पंक्तियाँ।


    संजय भास्कर
    नई पोस्ट
    ये लो हम भी हुए दस हजारी
    पर आपका स्वागत है
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  6. apki muskaan me aur apke pyar me aapki dhoop chhupi hai jara use bikhero fir dekho.....

    sunder kriti.

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  7. प्रकृति का अद्भुत चित्रण..

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  8. सुंदर।

    इस मौसम में धूप का मजा ही अलग है।

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  9. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर भी की गई है। चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं.... आपकी एक टिप्पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  10. Hi...

    Muthi main gar dhoop jo aati...
    Kuchh anjuli main bhi bhar leta...
    Gahan andhere jo pal aate...
    Unhen prakashit main kar deta..

    Alunkrut hindi se suvasit bhavpurn kruti...

    Shubhkamnayen..

    Deepak Shukla..

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  11. Mere blog par bhi aapka swagat hai.....

    www.deepakjyoti.blogspot.com

    Deepak Shukla..

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  12. काश कि मेरे वश में होता
    धूप को मुट्ठी में भर लेती
    जब दिखते मेरे प्रिय उदास
    चेहरे पर उजास भर देती

    ....बहुत सुंदर प्रस्तुति...

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