
कागज का लघु अंश नहीं
दिल का हाल सुनाता हूँ
सुख दुःख हो या मिलन बिछोह
सीने पर रखकर लाता हूँ .
दुल्हन की हंसी खनकती सी
ओढ़कर उड़कर आऊं मैं
लिए खारा पानी बिरहन का
खामोश सा सब कह जाऊं मैं .
शीश नवाए खड़ा हूँ मैं
लिख दो मुझ पर मन की बात
भीतर अपने समाये हुए मैं
हूँ मैं तेरा सच्चा हमराज .
संगी मैं तेरे सपनों का
खुशियों का प्रमाण हूँ मैं
लगा कर रखो ह्रदय से
बीते वक़्त की आन हूँ मैं .
राधा मेरा पंथ निहारे
बैराग धरा है मीरा ने
श्यामसुंदर न मुडकर देखे
सन्देश न भेजा बंसीधर ने .
धरोहर मैं नवयौवन की
दीपक हूँ माँ की आस का
गोरी मुझे बांचे उलट पुलट
लाया प्रेम संदेशा तेरे प्रिय का .