मेरे भाव
Wednesday, September 29, 2010
दीपशिखा
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जीवन में है गति प्रखर गतिमान हो बढते जाना है टेढ़े रस्ते कुछ कठिन डगर लक्ष्य लक्ष्य को पाना है । हमराही मिलते हैं कितने कुछ दूर चले...
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Monday, September 27, 2010
विस्मय
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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुलार लुटाती हो देवों ने भ...
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Sunday, September 26, 2010
कन्या
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कन्या नहीं मिल रही का शोर कानों में पड़ा मुझे लगा क्या नवरात्र शुरू हो गए है । इन्हीं दिनों में होती है इनकी पूजा देवी बनाकर बाकी वर्ष भर को...
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Thursday, September 23, 2010
निर्वासन
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रामलला अपनी ही माँ को "माँ " पुकारने के लिए माँगा जा रहा है तुमसे तुम्हारे जन्म का प्रमाण । कितने डी एन ए टेस्ट से गुजरोगे अपने ही...
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Wednesday, September 22, 2010
आह ! पानी
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तूफ़ान उड़ा कर ले गया मेरे घरौंदे की छत को जल मग्न कर गया मेरी आशा और सपनों को . बेबस देखती मैं रह गई करूँ क्या कुछ सूझा नहीं प्रकृति की भ्रकु...
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Monday, September 20, 2010
विकल्प
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तीसों पहर सोच में बीते सपना कैसे होगा साकार किया था वादा दिन बीते कैसे लेगा वह आकार । प्रयास समर्थता से बढ़कर इष्टदेव को साथ लिए बनूँ ...
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Saturday, September 18, 2010
स्वीकार नहीं भीख
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छोटे बड़े अनगिनत अभावों के बीच रहना सीख लिया था मैंने । अब नहीं खलती थी कोई कमी नींद भी आ ही जाती थी तमाम कमियों के बीच । अपनी हालत पर आती थ...
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