मेरे भाव
Wednesday, January 26, 2011
महापर्व
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लोक तंत्र का महापर्व गणतंत्र की है पहचान मस्तक पर भर देता गर्व सैनिकों का अनुपम बलिदान जन जन ने गीता कहा नर नारी का हो सम्मान सं...
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Friday, December 31, 2010
नया साल आया है
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दुल्हन सा बैचैन मन जागा सारी रात नए वर्ष के द्वार पर आ पहुंची बारात । शहनाई पर 'भैरवी' छेड़े कोई राग या फूलों पर तितलियाँ लेकर ...
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Friday, October 1, 2010
रोना न आया
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बीज समाया धरती में अंकुर चाहे देखूं भोर खींच ली निर्दयी ने मेरे जीवन की डोर सुगबुगाना भी न आया । सृष्टि के उपवन में सुकोमल एक कली खिली कोपल...
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Wednesday, September 29, 2010
दीपशिखा
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जीवन में है गति प्रखर गतिमान हो बढते जाना है टेढ़े रस्ते कुछ कठिन डगर लक्ष्य लक्ष्य को पाना है । हमराही मिलते हैं कितने कुछ दूर चले...
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Monday, September 27, 2010
विस्मय
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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुलार लुटाती हो देवों ने भ...
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Sunday, September 26, 2010
कन्या
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कन्या नहीं मिल रही का शोर कानों में पड़ा मुझे लगा क्या नवरात्र शुरू हो गए है । इन्हीं दिनों में होती है इनकी पूजा देवी बनाकर बाकी वर्ष भर को...
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Thursday, September 23, 2010
निर्वासन
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रामलला अपनी ही माँ को "माँ " पुकारने के लिए माँगा जा रहा है तुमसे तुम्हारे जन्म का प्रमाण । कितने डी एन ए टेस्ट से गुजरोगे अपने ही...
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