मेरे भाव

Monday, August 30, 2010

यादों की सलीब

›
दिल करता है इंतज़ार कुछ इसको भी कह जाना जाते हो बहुत दूर मुझसे मन से दूर न जाना । झलक देखने को व्याकुल दर्शन को तरसेंगी अँखियाँ कहाँ मैं देखू...
8 comments:
Saturday, August 28, 2010

अंकुर की चाह

›
मिटटी कुछ कहती नहीं बस रखती है अपने भीतर छुपा के सृजना का गुर । अंकुरित करती है नव जीवन जड़ों से रखती है थामे पृथ्वी को । धैर्य है उसक...
8 comments:
Saturday, August 21, 2010

चन्दन वन में

›
अपने सपनो के बनाती हूँ पंख उड़ चलो तुम सात समंदर पार । अपनी आँखों की बनाती हूं ज्योति बढ़ चलो तुम शिखर की ओर । अपने भावों की बनाती हूं पतवार क...
14 comments:
Thursday, August 19, 2010

आंसू

›
आंसू नहीं हैं बहाने के लिए संजो कर रखो छुपा कर रखो इन्हें अनमोल मोती हैं तुम्हारे मन सागर के ह्रदय सीपी की धरोहर हैं ये । भावों की पतवा...
16 comments:
Sunday, August 15, 2010

सपने और संघर्ष

›
उठाई जब कलम रचने को इतिहास ख़ुशी से लगे इतराने मेरे कागजात । चेहरा मेरा दर्प से नहाया आज मुझे भी कुछ अभिमान हो आया । समय की भट्टी ने चाहा जि...
16 comments:
Friday, August 13, 2010

माचिस की तीली

›
हर तीली में समाई है वही आग जो करती है प्रज्वलित पावन दीप जलाती है चूल्हा सुलगाती है अंगीठी दहकाती है भट्टी जो गलाती है लोहा बनाती है इस्पात ...
8 comments:
Wednesday, August 11, 2010

लहरें उतरी आसमान से

›
लहरें उतरी आसमान से कहती हैं सब है मेरा धीर धरा या नीला नभ इन सबको हमने है घेरा . कैसे रूखे रह पाओगे जीवन प्राण मैं भर दूँगी अतृप्त रहे न ...
4 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
View my complete profile
Powered by Blogger.