मेरे भाव
Friday, April 30, 2010
तितली
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सतरंगी पालकी पर इठलाती है फिरती है कौन यह अरे !!! ये तो है तितली । किस चित्रकार की तूलिका से निकली फूलों से करती आलिंगन बागों में उड़ती मनचल...
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Monday, April 26, 2010
लड़कियां
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हमसे है रौनक जहाँ की शोभा हमसे बागवां की हम भोर की हैं रश्मियाँ हम बेटियां, हम लड़कियां । गौरेया सी फुदकती मैया के आँचल में कोयल सी चहकती भैय...
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Tuesday, April 20, 2010
गेहूं की बालियाँ
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सुनहरी सुनहरी गेहूं की बालियाँ जैसे भू पर सजी हों सोने की थालियाँ । ये मेहनत हमारी कि लरजकर लहरायें है हिम्मत हमारी कि रज से रजत उपजाएँ । स्...
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Monday, April 19, 2010
मेरी परिधि
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असंख्य वृत्त नित्य निर्मित अनवरत है परिक्रमा मेरी मध्य मेरे अपने मेरे सपने यही तो है परिधि मेरी । संसार मेरा यह परिधि चक्र खो गया जिसमे मेरा...
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Thursday, April 15, 2010
माली
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कली ने कली से कहा कान में ये माली है या कि रचयिता हमारा हमें ये सहेजे, हमें ये संवारे आखिर ये लगता है कौन हमारा । भोर हुई, आये आतुर से प्या...
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Sunday, April 11, 2010
कागज़
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कागज़ का पुर्जा हूँ मैं या एक छोटा सा टुकड़ा मुझमें देख रही है गोरी अपने प्रिय का मुखड़ा । कागज़, एक कोरा कागज़ या हूँ तेरे मन की स्लेट जो कुछ ...
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Tuesday, April 6, 2010
दीप
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गहन तिमिर में सेंध लगा एक ज्योतिपुंज लहराया घोर अँधेरा जितना भी हो विजय दर्प फहराया । रात अमावस की हो चाहे चन्द्र दूज बन आऊंगा सघन निशा क...
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