मेरे भाव

Wednesday, March 31, 2010

गिलहरी

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युद्ध बिगुल बज उठा वानर सेना ने कसम उठाई लंका को जीत हम लेंगे सागर के उर पर करें चढाई । महासागर पर सेतु बाँधा नल और नील कुशल निर्माता पत्थर ...
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Friday, March 19, 2010

नदिया की धार

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कलकल करता जल शीतल कितना पावन, कितना निर्मल लुभाती है नदिया की धार चराचर का जीवन आधार । इठलाती बलखाती लहरें मीठा राग सुनाती हैं नदिया का सागर...
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द्वन्द

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मरुभूमि में खड़ी अकेली तपता सूरज है सिर पर मृग कस्तूरी खोज रही पानी का सोता दूरी पर ।।। इच्छा है प्यास बुझाऊं मैं वह आगे बढता जाता है मैं ज...
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Thursday, March 11, 2010

सृजन के बीज

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अपने आँगन की क्यारी में बीज सृजन के मैंने बोये गर्भ गृह में समा गया क्या सोच सोच कर मन रोये । एक सुबह देखा मैंने पाषाण धरा को चीर बाती सा एक...
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Tuesday, March 9, 2010

सबसे न्यारा दोस्त

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रश्क हो चला हमें भाग्य से सखा जो ऐसा दिया है लाकर भर दी जिसने झोली मेरी नीलगगन से जुगनू लाकर । दोस्त मेरा है सबसे प्यारा कितना सुन्दर, कितना...
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Saturday, March 6, 2010

प्रभु बसे मन माहीं

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कान्हा की रुकमन ना थी राधा जैसी ताब कहाँ धन्य कहूँ मैं अपने को यदि मीरा जैसी भी बात यहाँ । अपने गिरधर के रंग में रंग जाऊ यदि मीरा जैसी कोई र...
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Monday, February 22, 2010

रंग बरसे

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होली आने में दिवस बचे रंगों की फुहार चली आई । हम बाट जोहते कान्हा की राधा रंग लिए चली आई । है मेला रंग, गुलालों का जज्बातों का, मनुहारों का...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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