मेरे भाव
Friday, May 20, 2011
सृजन के बीज
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अपने आँगन की क्यारी में बीज सृजन के मैंने बोये गर्भ गृह में समा गया क्या सोच सोच कर मन रोये । एक सुबह देखा मैंने पाषाण धरा को चीर बाती सा...
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Friday, March 18, 2011
रंग बरसे
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होली आने में दिवस बचे रंगों की फुहार चली आई । हम बाट जोहते कान्हा की राधा रंग लिए चली आई । है मेला रंग, गुलालों का जज्बातों का, मन...
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Wednesday, January 26, 2011
महापर्व
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लोक तंत्र का महापर्व गणतंत्र की है पहचान मस्तक पर भर देता गर्व सैनिकों का अनुपम बलिदान जन जन ने गीता कहा नर नारी का हो सम्मान सं...
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Friday, December 31, 2010
नया साल आया है
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दुल्हन सा बैचैन मन जागा सारी रात नए वर्ष के द्वार पर आ पहुंची बारात । शहनाई पर 'भैरवी' छेड़े कोई राग या फूलों पर तितलियाँ लेकर ...
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Friday, October 1, 2010
रोना न आया
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बीज समाया धरती में अंकुर चाहे देखूं भोर खींच ली निर्दयी ने मेरे जीवन की डोर सुगबुगाना भी न आया । सृष्टि के उपवन में सुकोमल एक कली खिली कोपल...
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Wednesday, September 29, 2010
दीपशिखा
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जीवन में है गति प्रखर गतिमान हो बढते जाना है टेढ़े रस्ते कुछ कठिन डगर लक्ष्य लक्ष्य को पाना है । हमराही मिलते हैं कितने कुछ दूर चले...
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Monday, September 27, 2010
विस्मय
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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुलार लुटाती हो देवों ने भ...
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