मेरे भाव

Friday, March 18, 2011

रंग बरसे

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होली आने में दिवस बचे   रंगों की फुहार चली आई । हम बाट जोहते कान्हा की राधा रंग लिए चली आई । है मेला रंग, गुलालों का जज्बातों का, मन...
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Wednesday, January 26, 2011

महापर्व

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लोक तंत्र का महापर्व गणतंत्र की है पहचान मस्तक पर भर देता गर्व सैनिकों का अनुपम बलिदान जन जन ने गीता कहा नर नारी का हो सम्मान सं...
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Friday, December 31, 2010

नया साल आया है

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दुल्हन सा बैचैन मन जागा सारी रात नए वर्ष के द्वार पर आ पहुंची बारात ।  शहनाई पर 'भैरवी'  छेड़े कोई राग  या फूलों पर तितलियाँ  लेकर ...
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Friday, October 1, 2010

रोना न आया

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बीज समाया धरती में अंकुर चाहे देखूं भोर खींच ली निर्दयी ने मेरे जीवन की डोर सुगबुगाना भी न आया । सृष्टि के उपवन में सुकोमल एक कली खिली कोपल...
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Wednesday, September 29, 2010

दीपशिखा

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जीवन में है गति प्रखर गतिमान हो बढते जाना है टेढ़े रस्ते कुछ कठिन डगर लक्ष्य लक्ष्य को पाना है । हमराही मिलते हैं कितने कुछ दूर चले...
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Monday, September 27, 2010

विस्मय

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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुलार लुटाती हो देवों ने भ...
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Sunday, September 26, 2010

कन्या

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कन्या नहीं मिल रही का शोर कानों में पड़ा मुझे लगा क्या नवरात्र शुरू हो गए है । इन्हीं दिनों में होती है इनकी पूजा देवी बनाकर बाकी वर्ष भर को...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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