मेरे भाव
Monday, October 1, 2018
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हिंदी : विश्वभाषा आओ सुनाऊं तुम्हें एक कहानी भाषाई महल में थी संस्कृत पटरानी लेकिन जटिलता बहुत ही बड़ी थी तनिक भी मिठ...
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Monday, August 13, 2018
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नया भारत नई सुबह लेकर आई नवयुग का सुंदर संदेश शिक्षा और शान्ति लाई हमसे कमतर हो परदेस । बजा नई तकनीक का डमरू प...
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Thursday, August 9, 2018
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मन के चक्षु इक सूरदास सा था जीवन बस चलते ही जाना है रुकना न कहीं पल भर को मंजिल तक बढ़ते जाना है. किलकारी जब मारी उसने अपन...
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Thursday, October 27, 2016
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अँधेरा अमावस की वो काली रात थी पर किस्मत जो मेरे साथ थी घेरे था मुझे घुप्प अँधेरा जैसे न होगा कभी सवे...
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Monday, January 25, 2016
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राजपथ से. . . . . . . रंग बिरंगे सब फूलों की सुगंध एक बन जाऊं तितलियाँ भ्रमर करें परिहास मैं सारा उपवन महकाऊँ। सतरंगी मेले में ...
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Tuesday, December 15, 2015
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धूप के पीछे एक सर्द सुबह , गुनगुनी धूप जाड़ों में कितनी भली लगे छत का कोना, अखबार हाथ में एक चाय की प्याली खूब जमे । जीवन की...
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Tuesday, June 16, 2015
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शैल पहाड़ कहो या गिरि मुझको पर मैं हूँ एक प्रहरी सजग सीमा पर खड़ा किया मुझको कर के सबसे अलग थलग नदियों का उद्गम मुझसे देती स...
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