मेरे भाव

Thursday, October 27, 2016

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अँधेरा  अमावस की वो  काली रात थी  पर किस्मत जो  मेरे साथ थी  घेरे था मुझे  घुप्प  अँधेरा  जैसे न होगा  कभी सवे...
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Monday, January 25, 2016

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राजपथ से. . . . . . .  रंग बिरंगे सब फूलों की सुगंध एक बन जाऊं तितलियाँ भ्रमर करें परिहास मैं सारा उपवन महकाऊँ। सतरंगी मेले में ...
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Tuesday, December 15, 2015

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धूप के पीछे  एक सर्द सुबह , गुनगुनी धूप जाड़ों में कितनी भली लगे छत का कोना, अखबार हाथ में एक चाय की प्याली खूब जमे  । जीवन की...
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Tuesday, June 16, 2015

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शैल  पहाड़ कहो या गिरि  मुझको पर मैं हूँ एक प्रहरी  सजग सीमा पर खड़ा किया मुझको कर के सबसे अलग थलग नदियों का उद्गम मुझसे देती स...
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Tuesday, December 9, 2014

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लब  खामोश हैं  कौन कहता है कि बोलने के लिए कुछ कहने के लिए शब्दों की है जरुरत यहाँ तो बिन बोले ही बिना कुछ कहे ही एक लम्बी ...
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Sunday, December 16, 2012

सर्दी

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कोहरे के आलिंगन में है भोर ने आँखे खोली चारों ओर देख कुहासा न निकली उसकी बोली । सरजू भैया मिलें कहीं तो उनसे सब बोलो क्यों ओढ़े हो...
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Wednesday, December 12, 2012

लाडली

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आ मेरी नन्ही परी, तुझे गले से लगा लूँ मेरे आँगन की है तू गोरैया, सौ सौ बार लूँ तेरी बलेयाँ लाडो मेरी तू चहकती रहे, मा...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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