मेरे भाव
Monday, January 25, 2016
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राजपथ से. . . . . . . रंग बिरंगे सब फूलों की सुगंध एक बन जाऊं तितलियाँ भ्रमर करें परिहास मैं सारा उपवन महकाऊँ। सतरंगी मेले में ...
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Tuesday, December 15, 2015
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धूप के पीछे एक सर्द सुबह , गुनगुनी धूप जाड़ों में कितनी भली लगे छत का कोना, अखबार हाथ में एक चाय की प्याली खूब जमे । जीवन की...
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Tuesday, June 16, 2015
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शैल पहाड़ कहो या गिरि मुझको पर मैं हूँ एक प्रहरी सजग सीमा पर खड़ा किया मुझको कर के सबसे अलग थलग नदियों का उद्गम मुझसे देती स...
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Tuesday, December 9, 2014
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लब खामोश हैं कौन कहता है कि बोलने के लिए कुछ कहने के लिए शब्दों की है जरुरत यहाँ तो बिन बोले ही बिना कुछ कहे ही एक लम्बी ...
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Sunday, December 16, 2012
सर्दी
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कोहरे के आलिंगन में है भोर ने आँखे खोली चारों ओर देख कुहासा न निकली उसकी बोली । सरजू भैया मिलें कहीं तो उनसे सब बोलो क्यों ओढ़े हो...
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Wednesday, December 12, 2012
लाडली
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आ मेरी नन्ही परी, तुझे गले से लगा लूँ मेरे आँगन की है तू गोरैया, सौ सौ बार लूँ तेरी बलेयाँ लाडो मेरी तू चहकती रहे, मा...
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Tuesday, December 11, 2012
विस्मय
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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुल...
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