मेरे भाव

Tuesday, December 9, 2014

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लब  खामोश हैं  कौन कहता है कि बोलने के लिए कुछ कहने के लिए शब्दों की है जरुरत यहाँ तो बिन बोले ही बिना कुछ कहे ही एक लम्बी ...
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Sunday, December 16, 2012

सर्दी

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कोहरे के आलिंगन में है भोर ने आँखे खोली चारों ओर देख कुहासा न निकली उसकी बोली । सरजू भैया मिलें कहीं तो उनसे सब बोलो क्यों ओढ़े हो...
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Wednesday, December 12, 2012

लाडली

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आ मेरी नन्ही परी, तुझे गले से लगा लूँ मेरे आँगन की है तू गोरैया, सौ सौ बार लूँ तेरी बलेयाँ लाडो मेरी तू चहकती रहे, मा...
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Tuesday, December 11, 2012

विस्मय

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सृष्टि की जननी बनकर है सृष्टा का भेस धरा वृहत वसुंधरा से बढ़कर रचयिता ने शरण स्वर्ग भरा । माँ कहलाई महिमा पाई ममता दुल...
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Monday, November 5, 2012

दीया

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एक दीया कहे एक दीये से ,  आओ चलें तम की ओर।  फैलाएं उजियाप्रकाश का , ज्योतिर्मय हो चाहू ओर। लौ से लौ मिले ,  जगमग है सृष्टि सार...
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Wednesday, July 4, 2012

घन छाये

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(पावस की प्रथम बूंदों की प्रतीक्षा में ) जेठ की तपती दुपहरी  धरा थी शुष्क दग्ध  मेघ आये ले सु...
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Monday, May 28, 2012

लगता है कुछ तुम सा

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(चित्र गूगल से साभार )   स्मृति की सीप से  एक मोती है उपजा  स्निग्ध श्वेत धवल  लगता है कुछ तुम सा स्नेह...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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