मेरे भाव

Monday, November 5, 2012

दीया

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एक दीया कहे एक दीये से ,  आओ चलें तम की ओर।  फैलाएं उजियाप्रकाश का , ज्योतिर्मय हो चाहू ओर। लौ से लौ मिले ,  जगमग है सृष्टि सार...
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Wednesday, July 4, 2012

घन छाये

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(पावस की प्रथम बूंदों की प्रतीक्षा में ) जेठ की तपती दुपहरी  धरा थी शुष्क दग्ध  मेघ आये ले सु...
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Monday, May 28, 2012

लगता है कुछ तुम सा

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(चित्र गूगल से साभार )   स्मृति की सीप से  एक मोती है उपजा  स्निग्ध श्वेत धवल  लगता है कुछ तुम सा स्नेह...
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Tuesday, May 1, 2012

पृथ्वी थकती नहीं

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(चित्र गूगल से साभार ) गतिमान है  धुरी पर  परिक्रमा करनी है पूरी  प्रहर गिनती पोरों पर कहीं दूर न हो  दूरी ...
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Monday, April 23, 2012

यशोधरा

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(ख्यातिप्राप्त चित्रकार मंजीत सिंह जी का चित्र वियोगिनी यशोधरा -साभार  ) यशोधरा सी एक नारी बनी कुंवर  की वामांगी महलों की थी राज...
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Wednesday, April 11, 2012

रिश्ते

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फुर्सत के कुछ लम्हों में मन करता चिंतन मनन रिश्तों ने जकड़ा पाश में अवरुद्ध किया है दूर गमन क्या ही अच्छा रहता स्वछंद विचरता हर प्राणी भ...
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Friday, March 23, 2012

सैनिको के खाने का डिब्बा

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(इन दिनों मैं रक्षा मंत्रालय में पदस्थापित हूँ. यहाँ सुरक्षा में तैनात सेना के जवानों , केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों  के लिए खान...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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