मेरे भाव
Monday, April 23, 2012
यशोधरा
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(ख्यातिप्राप्त चित्रकार मंजीत सिंह जी का चित्र वियोगिनी यशोधरा -साभार ) यशोधरा सी एक नारी बनी कुंवर की वामांगी महलों की थी राज...
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Wednesday, April 11, 2012
रिश्ते
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फुर्सत के कुछ लम्हों में मन करता चिंतन मनन रिश्तों ने जकड़ा पाश में अवरुद्ध किया है दूर गमन क्या ही अच्छा रहता स्वछंद विचरता हर प्राणी भ...
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Friday, March 23, 2012
सैनिको के खाने का डिब्बा
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(इन दिनों मैं रक्षा मंत्रालय में पदस्थापित हूँ. यहाँ सुरक्षा में तैनात सेना के जवानों , केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवानों के लिए खान...
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Wednesday, February 22, 2012
मोम
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मोम की गुड़िया बनाई विधना ने अपने हाथ फिर उसकी की बिदाई देकर किसी का साथ कोमल वह सकुचाई सी आगे था सारा संसार चले जरा शरमाई सी क...
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Friday, February 17, 2012
ओस
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बन ओस की निर्मल बूँद बरस गए मेरी बगिया हर पंखुरी आँखें मूँद करती आपस में बतियाँ भोर हुई आया अरुणाभ चुन चुन उनको ले भागा सुन्दर , शी...
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Friday, February 10, 2012
सृजन के बीज
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अपने आँगन की क्यारी में बीज सृजन के मैंने बोये गर्भ गृह में समा गया क्या सोच सोच कर मन रोये । एक सुबह देखा मैंने पाषाण धरा को चीर बाती...
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Saturday, January 28, 2012
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आया वसंत मेरे गाँव शीत की प्रीत छोड़ धूप ने बढ़ाये पाँव ठिठुरन से मुख मोड़ आया वसंत मेरे गाँव खिल उठी हैं रश्मियाँ लुटा रही स्वर्ण ...
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