मेरे भाव
Wednesday, February 22, 2012
मोम
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मोम की गुड़िया बनाई विधना ने अपने हाथ फिर उसकी की बिदाई देकर किसी का साथ कोमल वह सकुचाई सी आगे था सारा संसार चले जरा शरमाई सी क...
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Friday, February 17, 2012
ओस
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बन ओस की निर्मल बूँद बरस गए मेरी बगिया हर पंखुरी आँखें मूँद करती आपस में बतियाँ भोर हुई आया अरुणाभ चुन चुन उनको ले भागा सुन्दर , शी...
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Friday, February 10, 2012
सृजन के बीज
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अपने आँगन की क्यारी में बीज सृजन के मैंने बोये गर्भ गृह में समा गया क्या सोच सोच कर मन रोये । एक सुबह देखा मैंने पाषाण धरा को चीर बाती...
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Saturday, January 28, 2012
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आया वसंत मेरे गाँव शीत की प्रीत छोड़ धूप ने बढ़ाये पाँव ठिठुरन से मुख मोड़ आया वसंत मेरे गाँव खिल उठी हैं रश्मियाँ लुटा रही स्वर्ण ...
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