मेरे भाव
Saturday, January 28, 2012
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आया वसंत मेरे गाँव शीत की प्रीत छोड़ धूप ने बढ़ाये पाँव ठिठुरन से मुख मोड़ आया वसंत मेरे गाँव खिल उठी हैं रश्मियाँ लुटा रही स्वर्ण ...
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