मेरे भाव

Saturday, January 28, 2012

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  आया वसंत मेरे गाँव  शीत की प्रीत छोड़  धूप ने बढ़ाये पाँव  ठिठुरन से मुख मोड़  आया वसंत मेरे गाँव  खिल उठी हैं रश्मियाँ  लुटा रही स्वर्ण ...
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मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
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