मेरे भाव
Wednesday, January 25, 2012
कैसे गणतंत्र मने मेरे गाँव
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गायब खेतों की हरियाली सड़कों की देखो बदहाली उजड़ गई बरगद की छाँव कैसे गणतंत्र मने मेरे गाँव भूखे सोये अब भी बुधना बच्चे...
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Friday, January 13, 2012
पंचवटी
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पंचवटी: भारतीय संस्कृति में एक अहम् स्थान रखती है. आचार्य मैथिली शरण गुप्त जी के पंचवटी से प्रेरित होकर एक खंड काव्य लिखना चाह रही हूँ. ...
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Thursday, January 5, 2012
बहुत दिनों बाद
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आज धूप थोड़ी अधिक खिली है पत्तों में है नया हरापन बहुत दिनों बाद आज फूल थोड़े अधिक चटक हैं उनकी लाली में है कुछ हया बह...
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Tuesday, December 20, 2011
कठिन रास्ते
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हर राह करे इन्तजार ले जाने को सदैव तैयार कुछ हल्के भारी भरकम कहीं लम्बे दूरी के कम साथ निभाते मंजिल तक लौट भी जाते आखें ढक...
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Tuesday, December 13, 2011
घन छाये
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जेठ की तपती दुपहरी धरा थी शुष्क दग्ध मेघ आये ले सुनहरी पावस की बूंदे लब्ध संचार सा होने लगा जी उठी जीवन मिला सोया ...
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Friday, December 9, 2011
धूप
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सोने सा पराग बिखराती चंचल सी पीत रश्मियाँ गहन कालिमा भी हर लेतीं लगती नन्ही तरुणियाँ उज्जवल चादर का सिरा पकड़ यह आगे बढती जाती हैं फ...
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Monday, November 28, 2011
किताब
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किताब के पन्नों को पलटते हुए ये ख्याल आया यूं पलट जाए जिन्दगी सोचकर रोमांच हो आया । ख्वाबों में जो बसते हैं सम्मुख...
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