मेरे भाव

Tuesday, October 25, 2011

कैसे दीप जलाऊं मैं

›
चहुँ ओर तिमिर का घन कैसे दीप जलाऊं मैं कुछ छंट जाये होवें कम थोड़े जुगनू ले आऊं मैं ममता की आँखें पथराई कैसे दीप जलाऊं मैं...
20 comments:
Friday, May 20, 2011

सृजन के बीज

›
अपने आँगन की क्यारी में बीज सृजन के मैंने बोये गर्भ गृह में समा गया क्या सोच सोच कर मन रोये । एक सुबह देखा मैंने पाषाण धरा को चीर बाती सा...
21 comments:
Friday, March 18, 2011

रंग बरसे

›
होली आने में दिवस बचे   रंगों की फुहार चली आई । हम बाट जोहते कान्हा की राधा रंग लिए चली आई । है मेला रंग, गुलालों का जज्बातों का, मन...
31 comments:
Wednesday, January 26, 2011

महापर्व

›
लोक तंत्र का महापर्व गणतंत्र की है पहचान मस्तक पर भर देता गर्व सैनिकों का अनुपम बलिदान जन जन ने गीता कहा नर नारी का हो सम्मान सं...
22 comments:
Friday, December 31, 2010

नया साल आया है

›
दुल्हन सा बैचैन मन जागा सारी रात नए वर्ष के द्वार पर आ पहुंची बारात ।  शहनाई पर 'भैरवी'  छेड़े कोई राग  या फूलों पर तितलियाँ  लेकर ...
21 comments:
Friday, October 1, 2010

रोना न आया

›
बीज समाया धरती में अंकुर चाहे देखूं भोर खींच ली निर्दयी ने मेरे जीवन की डोर सुगबुगाना भी न आया । सृष्टि के उपवन में सुकोमल एक कली खिली कोपल...
29 comments:
Wednesday, September 29, 2010

दीपशिखा

›
जीवन में है गति प्रखर गतिमान हो बढते जाना है टेढ़े रस्ते कुछ कठिन डगर लक्ष्य लक्ष्य को पाना है । हमराही मिलते हैं कितने कुछ दूर चले...
10 comments:
‹
›
Home
View web version

About Me

My photo
मेरे भाव
अपने बारे में कहने को कुछ खास नहीं है. दिल्ली में जन्मी, पली बढ़ी, और भारत सरकार की सेवा कर रही हूँ... पढना अच्छा लगता था सो वही से लिखना भी अच्छा लगने लगा.. यदि मन के भावों को , जज्बातों को शब्द देना यदि कविता है, साहित्य है .. तो कविता लिख रही हूँ, साहित्य सृजन कर रही हूं.
View my complete profile
Powered by Blogger.